अगर आत्मा ज़िंदा हो तो शेयर करें










Dear All,

Need your attention Please!!!!!

I am writing with lots of anger and sadness and as a defeated person who is not able to do anything to give fair justice to my lovely Sister Ms. Indu Yadav who were married last year with Mr Sudhir Yadav from Jaipur. Indu were studying in one of the best college of Rajasthan called MNIT and was doing her MSc in Physics.

I am very sad to inform you that on 26th January when all nation were celebrating Republic day Indu’S in Laws has brutally killed her for dowry issue. We have given all possible things to my sister out of our “HASIYAT” but their demand was never ending and finally on 26th January they have killed my lovely sister.

Another Sad part of this issue is that all the Govt bodies like Police, Administration and other concern department have also been set by those inhuman people hence nobody has taken any action against them and all of them are freely moving here and there with lots of smile in their brutal faces. Police asking us stupid questions like, First prove that she was married to them, You are her parent etc..

We are totally helpless and seeking help now through Facebook as this social site have given justice to lot of people around the world. Will you please help me to share this as much as possible so that Govt of Rajasthan will get to know what is happening in the capital of Rajasthan .

Please

Brother.
By: Skc Yadav


देखिये इस खूबसूरत चेहरे को ..........और कितनी क्रूरता से दहेज़ 

लोभियों ने इसका क़त्ल किया है ............एक मजबूर भाई और परिवार 

के लिए हम इतना तो कर ही सकते हैं कि जब कोई साथ न दे रहा हो तो

 हम सब मिलकर आवाज़ उठाएं और सारी दुनिया तक सच पहुंचाएं .ये 

मुझे फेसबुक पर मिला और वहां हम सबने इसे शेयर किया है आप सब 

भी शेयर करके एक आवाज़ उठाएं ताकि आगे कोई इस तरह का कुकृत्य 

करने की कोशिश न करे .




धन्यवाद

वंदना गुप्ता 

गिलहरी बंदर का साथ : खुशियों की आई है बारात

गिलहरी आई बंदर के साथ

दोनों पेड़ों की शाखों पर

दीवारों की मुंडेरों पर

गलियों में पगडंडियों पर

जैसे मन में खुशियां

... मचलती रहती हैं

वैसे ही वे भी मंडराते हैं

पर अलग अलग पाए जाते हैं

एक साथ देखकर दोनों को

इंसान का सारा जंगल

आज मंगल के दिन

हतप्रभ है सचमुच

पर सब जानते हैं

प्‍यार में सब कुछ संभव है

हर चीज जायज है

इसी तरह सब ले रहे हैं

अपने नेक मन में खुशियों का जायजा

बुला रहे हैं सबको

तू भी आ, तू भी आ

पर भालू नहीं आया आज

उसने छुट्टी बढ़ा दी है

जब आएगा कल तब

उससे एक्‍स्‍प्‍लेनेशन मांगा जाएगा शुद्ध

क्‍योंकि कल है बुद्ध

दूध पिएं सब शुद्ध

न हो मिलावटी

यही तो है प्रभावटी।

फिज़ूलखर्ची की 26 जनवरी


आखिर गण की परेड का दिन आ गया। गण की आज छुट्टी है और तंत्र अपनी पूरी ताकत से इस दिन को सफल बनाने के लिए मुस्‍तैद है। वैसे सचमुच में जिसे परेड कहा जाता है, वह तो राष्‍ट्रपति भवन से शुरू होकर जनपथ, राजपथ से गुजरती हुई लालकिला पर पहुंच कर संपन्‍न हो जाती है। गण की परेड का मामला इससे अलग है। गणतंत्र परेड में शामिल होने के लिए आने वाले गणतंत्र के पहरुओं को कई किलोमीटर दूर बे-बस और बे-कार तथा बे-वाहन कर दिया जाता है फिर उनसे उम्‍मीद की जाती है कि वह राजपथ के दोनों ओर खूब भीड़-भड़क्‍का संपूर्ण शांति के साथ लगाएंगे। शोर मचाने की तो आजादी है परंतु उसकी आवाज नहीं आनी चाहिए। ऐसे अनेक अलिखित नियमों से आबद्ध परेड जब सचमुच में शुरू होती है, तब भी गण पैदल दौड़ –भाग कर उसके दर्शन का असीम आनंद लेना चाहता है। आखिर इस आनंद की सहज प्राप्ति के लिए सरकारी मुलाजिमों को पास और आवाम को बिना पास ही फ्री में पास कर दिया जाता है। बस खानापूरी के लिए कुछ जरूरी जांच निपटाई जाती हैं। कई बार इन जांचों में पाया गया है कि गण खुद ही निपट पिट जाता है और परेड स्‍थल के दीदार से भी वंचित रह जाता है। जबकि इस बार मामला दोहरा उलझाव भरा है। चुनाव सिर पर, अब जनता के सिर पर ही लड़े जा रहे हैं तो जनता के सिर पर ही माने जाएंगे, राजनीतिक दल तो बेपनाह धन खर्च करके इसके प्रति जाभार प्रकट कर देते हैं और नेता अपना भार स्‍वयं उठाने के अभ्‍यस्‍त नहीं होते, उनका भार गण ही उठाता रहा है और उठाता ही रहेगा।
परेड में सैन्‍य प्रदर्शन, धन बल प्रदर्शन और उसकी साज-सज्‍जा के साथ जानवरों को भी इंसान के साथ शामिल किया जाता है। इनमें ऊंट भी रहते हैं और मासूम चिडि़या भी। प्रत्‍येक प्रकार के नेक जानवर भी परंतु अनेक जानवरों के यहां पर पैर अथवा पर फड़फड़ाने पर पाबंदी रहती है। इस बार यह निर्णय भी लिया गया है कि सारी परेड को परदे के पीछे या नीचे से गुजारा जाएगा। अगर परदे के पीछे से गुजारा जाता है तो तीनों ओर बड़े विशालकाय परदे तान दिए जाएंगे और अगर परदे के नीचे से गुजारा जाता है तो जनता को कहा जाएगा कि परेड के दौरान अपनी आंखों को संपूर्ण विश्राम की मुद्रा में रहने दें, चाहे उससे यह ही संदेश क्‍यों न जा रहा हो कि सब सो रहे हैं। वैसे भी देश में जागने का हक सिर्फ राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए है। जनता तो है ही सोने और सुलाने के लिए लेकिन वह सचमुच की नींद नहीं लगी और अगर वह सचमुच की नींद लेती है तो उस पर बरसने वाली लाठियों के लिए वह खुद ही जिम्‍मेदार होगी। इसके लिए सरकारी अमले पर कोई जवाबदेही तय नहीं की जा सकेगी। अतीत की यादों से जो लिखा गया है, यह वही है और इसमें रत्‍ती भर भी बदलाव नहीं किया गया है।
अब आप सोच रहे होंगे कि भला ऐसी परेड का क्‍या फायदा जिसे खुली आंखों से देखा भी न जा सके तो जनता को पहले यह बतलाना होगा कि क्‍या सरकार उसे उनके घर से उन्‍हें बुलाने के लिए गई थी कि आप आकर परेड के दर्शन कीजिए। झांकियों का लुत्‍फ लीजिए। किसने कहा है कि इतनी कड़ाके की ठंड में न तो खुद चैन से रहें और न सुरक्षा में लगी हुई टीमों को चैन से रहने दें। नेपथ्‍य में गीत बज रहा है ‘परदे में रहने दो, परदा न हटाओ, परदा जो हट गया तो भेद खुल जाएगा’। जबकि इन परदों के पीछे हाथियों के होने की कोई विश्‍वस्‍त सूचना अभी तक नहीं मिली है।
परेड से हाथियों का संबंध तो पुराना है पर परदों और हाथियों का एक नया संबंध विकसित हुआ है और इसका प्रभाव अगर गणतंत्र दिवस परेड पर भी दिखाई दे रहा है तो इसमें कतई आश्‍चर्य नहीं होना चाहिए। बल्कि परेड पर अगर परदा ताना जाता है तो इसकी जिम्‍मेदारी हाथियों की बनती है कि उन्‍हीं के कारण यह स्थिति हुई है। उन्‍हीं की मूर्तियों के कारण कड़ाके की सर्दियों के इस ठंडे माहौल में इतनी गर्मी आई है। सोचा यह भी जा रहा है कि जब सर्दियां चली जाएंगी तब क्‍या यह गर्मी कायम रह पाएगी, अगर यह गर्मी रह गई तो इससे निजात पाने के प्रकृति प्रदत्‍त तरीके तलाशने होंगे।  अन्‍यथा बिजली का होने वाला अपव्‍यय नहीं रोका जा सकेगा। वैसे भी मूर्तियों के बनाने और उन पर परदों के ढकने को भी फिजूलखर्ची मान कर खूब बवाल काटा गया है। लगता है फिजूलखर्ची का हम वर्ल्‍ड रिकार्ड बनाने पर आमादा हो चुके हैं।

सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर न रोक, न ठोक - बस जरा सी टोक


http://www.facebook.com/avinashvachaspati

एक ऐसी आजादी जो अराजकता बनती जा रही है जबकि चंद विवेकहीन लोग ही इसके लिए जिम्‍मेदार हैं। मेरा तो यह कहना है फेसबुक को सेफबुक बनाने के या अन्‍य ऐसी साइट्स के जरिए अभिव्‍यक्ति की आजादी के नाम पर अराजकतावादी माहौल न बने, इसके लिए इनमें पंजीकरण करने व खाता खोलने के लिए वैध पहचान पत्र की पूरी जानकारी और उसकी स्‍कैनप्रति भेजने की अनिवार्यता कर दी जानी चाहिए। बिल्‍कुल उसी प्रकार जिस प्रकार पासपोर्ट, राशन, वोटर, आधार, बैंक खाता, ड्राइविंग लाईसेंस इत्‍यादि की अनिवार्यता होती है। इसके साथ कम से कम आयु सीमा और चित्र की जरूरत भी होनी चाहिए और इसके बिना तो खाता खोला ही न जाए। इन अपेक्षाओं को पूरा न करने वालों का इन सोशल नेट‍वर्किंग साइट्स पर रजिस्‍ट्रेशन होना ही नहीं चाहिए। इससे आप देखेंगे कि आधी से अधिक समस्‍या का हल तो यूं ही चुटकियों में हो जाएगा। फिर भी इससे पूरी समस्‍या से बचा नहीं जा सकेगा इसके लिए एक नियम और भी हो कि रजिस्‍ट्रेशन के कम से कम पन्‍द्रह दिन के बाद खाता सक्रिय हो और इस अवधि में सोशल साइट्स का प्रबंधन जमा कराए गए दस्‍तावेजों का अपने स्‍तर पर ऑनलाईन सत्‍यापन अवश्‍य करा ले।

हिंदी चिट्ठों (ब्‍लॉगों) की लोकप्रियता बढ़ रही है लेकिन इसमें भी बेनामी या छद्मनामधारी प्रवेश पा चुके हैं। इन्‍हें भी फिल्‍टर किया जाना चाहिए। उपरोक्‍त नीति ही किसी भी भाषा के ब्‍लॉगों के निर्माण में जरूरी कर दी जाए। आरंभ में तो ऐसा महसूस होगा कि इससे अंतर्जाल में सक्रियता में कमी आई है परंतु जल्‍दी ही इन सब में एक स्‍वस्‍थ माहौल का निर्माण होगा जिससे वास्‍तविक रचनाकारों को प्रोत्‍साहन मिलेगा और इससे कापीराइट के उल्‍लंघन की समस्‍या से भी कुछ हद तक निजात मिलेगी। किसी के भी ब्‍लॉग से किसी भी सामग्री को अपने नाम से प्रकाशित करने के मामलों में निश्चित ही रोक लगेगी।

इसका यह हल बिल्‍कुल ठीक नहीं है कि हम तकनीक के खतरों से डर कर उस पर सरकारी प्रतिबंध ही लगा दें। अपितु इसके लिए ऐसी स्‍वस्‍थ नीतियों और अनुकूल नियमों को लागू करें जिससे इसमें शामिल होने वालों को सुरक्षा का अहसास हो सके। इससे उन फर्जी खातों में भी कुछ सीमा तक कमी आएगी जो आतंक फैलाने के लिए इन माध्‍यमों का दुरुपयोग कर रहे हैं।

फेसबुक पर मानसिक जंग की कुछ चुनिंदा शब्‍द तस्‍वीरें और अन्‍नास्‍वामी प्रवचन माला को 'फेसबुक महात्‍म्‍य' शीर्षक से पुस्‍तक रूप में प्रकाशित किया जा रहा है

गरीब का भूखा पेट
और उसमें से रिसती
आंतडि़यों की चरमराहट 
के रुदन को सुन वोट-पिपासु
सक्रिय हो उठे और जोर से
खिलखिलाए कुटिल हंसी

इस नाजुक दयनीय दौर में
दया के आकांक्षी असल में कौन हैं ?

वोट और वोटर दोनों की कीमत
लगाई जाती है और तेजी से गिराई जाती है
यही सच्‍ची राजनीति कहलाती है।






2.
मुदित हैं सब जानवर इस ऐलान से
कि अब उन्‍हें मारा नहीं, परदे में
सिर्फ परदे के नीचे ढका जाया करेगा।

निर्वाचन आयोग का हालिया फरमान जिसमें माया और हाथी की काया को परदे में सहेजने का आदेश पारित किया गया है।




3.
बंदर के बारे में आपकी असंतुलित टिप्‍पणियां मेनका जी को डिस्‍टर्ब कर सकती हैं। कृपया चौकस रहें। बंदर को कई बार अपने सैलफोन पर उनसे बतियाते पाया गया है। वैसे भी जीवन में उसूल बना लें कि कभी किसी के प्रति असंतुलित व अभद्र टिप्‍पणियां एवं चित्रों का प्रयोग न करे। यह हमारी कमजोरी का वायस है।




4.
एक नया निर्णय लिया गया है अब असली हाथियों से मूर्तियां पर परदा चढ़ाने का कार्य कराया जाएगा। हाथीवान शीघ्र संपर्क करें, इच्‍छुक हाथी खुद अपने आवेदन भी ई मेल से भेज सकते हैं।


5.
क्‍या यह सच है कि माया की मूर्तियों ने घूंघट ओ़ढ़ने और उनके हाथियों ने दांत छिपाने से मना कर दिया है ?


6
दिल्‍ली में आज धूप चिढ़ाकर चली गई 
और कल जो बंदर किसी ने पकड़ा था
आज वह कूद-छूट कर फरार हो गया।

अब कल मिलेंगे
रात को बुनेंगे जो
सपने अपनों को
बांटेंगे हम, मिलेंगे।


7 .
चल कर नेहरू प्‍लेस
कुछ तकलीफ पैरों को दूं

ऊंगलियां तो कीबोर्ड पर
सुबह से नृत्‍य कर रही हैं

पैरों को तकलीफ देने का वायदा
जालिम ऊंगलियों ने ही किया है

हाथ की ऊंगलियां बख्‍शती नहीं
न पैरों को, न दिमाग को, न खुद को।


8.
कुकर्मों पर परदा डालना कहां तक उचित है
पूछ रही हैं माया और हाथी की मूर्तियां
हमें सर्दी भी तो नहीं लग रही है
आप बे-वजह परेशान क्‍यूं हैं


9.
सेफबुक शुरू करेगी सरकार
फेसबुक के खतरों को भांपने के बाद
सरकार की एक महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक पहल
जोखिम का नायाब हल।

चीयर्स फॉर सेफबुक।


10.
मायावती ने अपने जन्‍मदिन पर भी झूठ बोलने से परहेज नहीं किया। जिन हाथियों को बनाने और उन्‍हें परदे के भीतर छिपाने में ही करोड़ों खर्च कर दिए गए। उन्‍हें 'खुला हाथी लाख का, बंद हाथी सवा लाख' का बतलाकर अवाम को फिर बातों की मायाबाजी से मूर्ख बनाने की कवायद में जुट गईं।


और अंत में एक सुखद सूचना


फेसबुक पर आज अन्‍नास्‍वामी प्रवचन माला का सांतवां दिन हैं और एक प्रतिष्ठित प्रकाशक महोदय ने इसके संपादित अंशों को सार्थक टिप्‍पणियों और टिप्‍पणीकारों के चित्र सहित प्रकाशन करने की स्‍वीकृति दे दी है। आप भी इस लिंक पर क्लिक करके इसमें शामिल हो सकते हैं। 

चिट्ठाकार सुमित प्रताप सिंह : सुमित के तड़के चिट्ठे के स्‍वामी मुलाकात करने वाले से एक मुलाकात

मैंने सोचा उनसे मिला जाए 
मिलने का पूरा किस्‍सा 
बगीची पर ब्‍यान किया जाए 
पर उनसे मिलना 
टेढ़ी खीर है 

मैंने कोशिश की 
किसी पगडंडी पर 
ईंट लगा दूं 
वह वहां से गुजरें 
और ईंट हटाएं 
इससे पहले कि 
वह ईंट हटाएं 


पूरा पढ़ने और मिलने के लिए क्लिक कीजिए

ये कौन आया रौशन हो गयी महफ़िल जिसके नाम से


सुस्वागतम २०१२ ..........नव वर्ष के आगमन पर आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं .........जीवन बगिया फूलों सी महकती रहे .........आपकी हर तमन्ना मुकाम पाती रहे ..........ज़िन्दगी हर पल चहकती रहे ..........चलिए दोस्तों आज की सुबह की शुरुआत हम सबकी शुभकामनाओं के साथ करते हैं और आप सबको ले चलती हूँ सबके लिंक्स पर इन प्यारे प्यारे गानों के साथ ........





नई सुबह.....

आओ झूमे गायें मिल के मौज मनाएं 



आपको सपरिवार नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं ...

बार बार दिन ये आये बार बार दिल ये गाये 



ब्लॉग जगत के मंगल पांडे ठाकुर पद्म सिंह

दीवाना मुझको लोग कहें मैं समझूं जग है दीवाना 



2012 !.....

आइये मेहेरबान आइये जानेजां शौक से लीजिये जी इश्क के इम्तिहान 



शुभकामनाएं - नए रूप

एक तेरा साथ हमको दो जहाँ से प्यारा है तू है तो हर सहारा है 



वर्ष 2012 और आपका मूलांक मूलांक के अनुसार कैसा होगा नया साल?

आने वाला पल जाने वाला है 
हो सके तो इसमें ज़िन्दगी बिता ले 
पल जो ये जाने वाला है 




" कोशिश रहेगी कि.... ..."

तुम  अगर साथ देने का वादा करो 
मैं यूँ ही मस्त नगमे सुनाता रहूँ 




आज से पहले आज से ज्यादा 
ख़ुशी आज तक नहीं मिली 



ये कौन आया रौशन हो गयी 
महफ़िल जिसके नाम से 




नीले नीले अम्बर पर चाँद जब छाये 
दिल को तडपाये प्यार बरसाए 




सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं 
हमें डर है हम खो न जाएँ कहीं 




माना हो तुम बेहद हसीं 
ऐसे बुरे हम भी नहीं 




सब कुछ सीखा हमने न सीखी होशियारी 
सच है दुनिया वालों कि हम हैं अनाड़ी 




रुक जा ओ जाने वाली रुक जा मैं हूँ राही तेरी मंजिल का 
नज़रों में तेरी मैं बुरा सही आदमी बुरा नहीं मैं दिल का 




आज पुरानी राहों से 
कोई हमें आवाज़ न दे 




तुझे देखा तो ये जाना सनम 
प्यार होता है दीवाना सनम 




मधुबन खुशबू देता है सागर सावन देता है 
जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है 




ज़िन्दगी इक सफ़र है सुहाना 
यहाँ कल क्या हो किसने जाना 




जिधर देखूं तेरी तस्वीर नज़र आती है 




ये मेरा दीवानापन है 
या मोहब्बत का सुरूर 




आज उनसे पहली मुलाकात होगी 
फिर आमने सामने बात होगी
फिर होगा क्या क्या पता क्या खबर 




कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है 
कि जैसे तुझको बनाया गया है मेरे लिए 




मैंने तेरे लिए ही साथ रंग के सपने चुने 
सपने सजीले सपने 




चाँद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा था 
हाँ तुम बिलकुल वैसी हो जैसा मैंने सोचा है 



HAPPY NEW YEAR २०१२

छोटी सी उम्र में लग गया रोग 

कहते हैं लोग मैं मर जाउंगी 





डम डम  डिगा डिगा मौसम भीगा भीगा 
हाय अल्लाह सूरत आपकी सुभान अल्लाह 




झूम झूम के नाचो आज नाचो आज 
गाओ ख़ुशी के गीत रे गाओ ख़ुशी के गीत 



चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना 
कभी अलविदा न कहना 




मेरी तमन्नाओं की तकदीर तुम संवार दो 
प्यासी है ज़िन्दगी और मुझे प्यार दो 




अपनी तो जैसे तैसे थोड़ी ऐसे या वैसे कट जाएगी 
आपका क्या होगा जनाबे आली 




आज फिर जीने की तमन्ना है 
आज फिर मरने का इरादा है 




चलिए दोस्तों इन्ही महकते चहकते गानों और पोस्टों के साथ आज की चर्चा को विराम देती हूँ और कामना करती हूँ आप सबके लिए नव वर्ष इसी प्रकार महकता चहकता रहे ...........

नया दिन नया उपहार : कविता है सद्कर्मों का व्‍यापार

उठो उठो जल्‍दी चाहे मत उठो
पर उठो सुबह सुबह समय से
पहले दिन ही मत बहाने गढ़ो
पढ़ो फेसबुक स्‍टेटस समय से
सोए देर से थेयह बहाना है
सर्दी है तो क्‍या हुआ नहाना
न नहाना अच्‍छा नहीं बहाना
पानी शरीर पर खूब है बहाना



पूरा पढ़ने का मन करे तो और पढ़ें पर क्लिक करें


और जुटे हैं बंधु पानी बचाने की मुहिम में

नया साल आया है, नहा लूं या पानी मैं बचा लूं

इन कोशिशों को सलाम करूं


या बाहर हो रही शुभकामनाओं की बरसात में अपने तन मन को भिगो लूं 

और इंतजार अभी बाकी है दोस्‍त

ग्‍यारह, बारह और तेरह : अब तेरह का इंतजार है


ज़रा एक नज़र इधर भी………हम भी खडे हैं राह में………ये है मेरा सफ़र


वंदना गुप्ता का खामोश सफ़र


प्रिय मित्रो सादर ब्लॉगस्ते!  आइये मित्रो आज क्रिसमस के शुभ अवसर पर काजू और किशमिश खाते हुए मिलते हैं ब्लॉग जगत के एक सक्रियसदस्य से. जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ वंदना गुप्ता जी की. दिल्ली के आदर्श नगर में रहते हुए अपने माता-पिता केआदर्शों को मन में संजोये हुए ये लगी हुईं हैं ब्लॉग लेखन द्वारा हिंदी माँ की सेवा में. इनके पिता तो चाहते थे  किउनकी बेटी आई.ए.एस. अधिकारी बने लेकिन बन गयीं ये लेखक और ब्लॉगर. अब होनी को जो मंज़ूर होता है वो हीहोता है. अब सोचिये यदि ये आई.ए.एस. अधिकारी  बन जाती तो ब्लॉग जगत की रौनक का क्या होताअथवा ब्लॉगर सम्मेलन उबाऊ न हो जाते. तो आइये धन्यवाद दें उस दुनिया बनाने वाले को जिन्होंने इस दुनिया कोऔर वंदना गुप्ता जी को बनाया और इन्हें आई.ए.एस. अधिकारी नहीं बनाया. वंदना गुप्ता जी लेखन की विविधविधाओं में लिखती हैं और बाकी बचा-खुचा चलिए इन्हीं से पूछ लेते हैं.  आगे...

ये नही देखा तो कुछ नही देखा …………


अनोखी यात्रा ………अनोखे पल

वन्दना at ज़ख्म…जो फूलों ने दिये - 21 seconds ago
चलिए मेरे साथ एक सफ़र पर अरे ये क्या ये पिलर ४२० बीच में कहाँ से आ गया कसम से टू मच हो गया ये तो उफ़ ...........ब्लोगर मिलन के मारे बेचारे पिलर ४२० पर ही अटक गए आधी ब्लोगर मीट तो नांगलोई में सिमट गयी ब्लोगर्स की मस्ती तो यहीं शुरू हो गयी चाय काफी की चुस्की साथ में मौसम सुहाना ये सफ़र तो रहा बड़ा मस्ताना ये सांपला में कौन पधारे देखें सारे सांपला वाले कोई इच्छाधारी तो नहीं आया हाँ हाँ ..........आया न सारे ही तो इच्छाधारी थे .........हा हा हा हमने दी नहीं कोई झूठी खबर देख लो अंतर्राष्ट्रीय मिलन ही था बोर्ड लगवा दिया गया स्वागत समारोह में ब्लोगर्स ने धमाल किया अब जाट देवता सं... more »
 
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