पृथ्वी के पानी से होता नहीं गुजारा : चांद के पानी पर निगाह हमारी है (अविनाश वाचस्पति)
पृथ्वी के पानी से होता नहीं गुजारा
चांद के पानी पर निगाह हमारी है।
आंखों का पानी बह गया है और
बहकर के चांद तक बहक गया है।
पानी के लिए युद्ध नहीं अब समूचे विश्व में
पानी पाने के लिए चांद की यात्रायें की जायेंगी।
चांद का पानी धरती पर उपलब्ध करवाने के लिए
भारत सरकार एक मंत्रालय स्थापित करेगा।
जब मंत्रालय बनाया जायेगा तो नि:संदेह
एक मंत्री और कई अन्य सह मंत्री बनाये जायेंगे।
चांद का पानी धरती पर उपलब्ध करवाने संबंधी
एक नया कारोबार शुरू किए जाने की संभावनाएं हैं।
चांद का पानी धरती पर लाने के लिए पाईप लाईन
बिछाई जायेंगी या अन्य कोई तकनीक खोजी जाएगी।
चांद का पानी धरती पर लाने के लिए पूरे विश्व में
एकजुटता दिखलाई देगी जिसमें सौहार्द की भावना विकसित होगी।
संभावना डब्ल्यू एच ओ की तर्ज पर
वाटर ऑन मून ऑर्गनाइजेशन बनाने की भी है।
कई सारे मुहावरे जैसे पानी में चांद निहारने की जगह
चांद में पानी निहारना व्यवहार में आयेंगे।
संभावनाएं और भी हैं, मन और मानस में झांक कर देखिए
आप भी कुछ ऐसा ही, इससे बेहतर ही सोच रहे हैं तो फिर
देर कैसी दर्ज करें टिप्पणियों में .........

