चर्चा नहीं करूंगा मैं
सिर्फ आप करेंगे
नये-नये ब्लॉगर
जितना पढ़ें और
जो अच्छा लगे
उस पर अपनी
राय प्रकट करें।
रोज बन रहे हैं
नये नये ब्लॉग
उन्हीं में से रोज या
प्रत्येक सप्ताह
किसी एक को
देंगे जिम्मेदारी।
वे जो भी पढ़ें
उन पर एक चर्चा
पेश करें।
आपका क्या ख्याल है
क्या ऐसा प्रयोग
किया जाना चाहिए ?
जिनके ब्लॉग अभी
नये हैं और वे
चाहते हैं कि
चिट्ठों के इस
महासागर में डुबकी लें
और मोती निकालें
तो वे अपने नाम
भेजें।
इसी ब्लॉग पर उन्हें
जुड़ने का आमंत्रण
भेजा जाएगा
फिर देखते हैं
चिट्ठाचर्चा में कौन
किसका सबसे अधिक
भेजा खाएगा ?

40 comments:
JI ha aap ki rai hame pasand aai taki nay bloger ko bhi moka milna chahey or un ko bhi pata chalna chahey blog ke bare me .aap ke is paras ke ley hum aap ke aabhari ha
बिल्कुल सही बात है.
स्वागत है भाई.
हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में वैकल्पिक मीडिया का प्रतिनिधि "जनोक्ति परिवार "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . आप हमारे ब्लॉग अग्रीगेटर पर भी पंजीयन कर सकते हैं . नीचे लिंक दिए गये हैं .
http://www.janokti.com/ , http://www.blogprahari.com
sahi farmaaya bhai ji !
swagat hai par tanki nahi hona chhiye ...ha ha
sAHMAT HOO
SAHAMAT HOO
शुभस्य शीघ्रम...
बिलकुल ! सही है !
sahi hai
नये ब्लॉगरों और रचनाकारों का उत्साहवर्धन के हिट में एक सुंदर विचार..स्वागत है..
आपकी बात में दम है
यह एक ऐतिहासिक कदम है।
चिट्ठा चर्चा करना आसान काम तो नहीं .. पर ज्योतिष का चिट्ठा चलाने से कठिन भी तो नहीं .. जब मैं ज्योतिष का चिट्ठा चला सकती हूं .. तो आप चिट्ठा चर्चा क्यूं नहीं कर सकते ??
बजा फ़रमाया अविनाश जी आपने।
अब लिखने से ज़्यादा पढ़ने का और उसे समझ कर उस पर राय देने का भी एक प्लेटफ़ार्म होना चाहिए, महज़ काउण्टर टिप्पणी का ज़माना शायद अब लद जाना चाहिए।
Bada achha khayal hai ! Tameel karen!
badhiya hai
अच्छी सोच आपकी।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
नेक काम के लिए शुभकामनाएं..
जय हिंद....
वाह अविनाश भाई नए साल का तोहफ़ा , ये तो बढिया विचार है , मगर इस पर आनन फ़ानन में काम मत शुरू कीजिएगा नहीं तो फ़िर सब एक दूसरे के भरोसे छोड कर चलते बनेंगे ,इसलिए एक रूपरेखा तय करके इसे मूर्त रूप देना ठीक होगा
अजय कुमार झा
@ अजय कुमार झा
आपसे अनुभवी कौन मिलेगा
आपका साथ सदा चलेगा
उपर जो तैयार हैं
और जो जुड़ने वाले हैं भविष्य में
सबके लिए एक रेखा ऐसी बनायें
जिसमें सबके रूप निखर जायें
जो आना चाहें जुड़ जायें
जो जाना चाहें चले जायें
आप बतलायें पहली चर्चा
यानी श्रीगणेश किनसे करवायें
ब्लॉग से जुड़ने का आमंत्रण
उन्हें तुरंत और जल्दी भिजवायें
अविनाश जी
सही विचार है
सब तैयार है
किजिए अजय जी की
बात पे गौर
फ़िर आमंत्रण भिजवाईए
चहुँ ओर
हम देते है आपको बधाई
चर्चा शीघ्र शुरु हो भाई
@ अजय कुमार झा
एक दूसरे नहीं
यह तो है ही
उस दूसरे के लिए
जो नया है
चाहता है चिट्ठा चर्चा करे
उसे भी चर्चा का आनंद मिले
बांटे आनंद को मिठाई की तरह
पर पहले बनाये हलवाई की तरह
जो जाना चाहे चला जाये
जो आना चाहे आ जाये
मिठाई बनाये पहले खुद खाये
फिर दूसरों को खिलाये
तो पहला हलवाई किसे बनायें
किसकी ई मेल पर आमंत्रण भिजवायें
जो चाहते हो शुरूआत करना
वे avinashvachaspati@gmail.com पर
ई मेल भेज दें।
अति सुन्दर विचार !!
:)
बहुत अच्छा रहेगा,प्रयोग तो होते ही रहने चाहिये,मैं आपको सफ़लता की अग्रिम बधाई देता हूं।
बढ़िया विचार।
आपके मुंह में घी-शक्कर.शुभ काम में देरी कॆसी मुन्नाभाई?
चलिए हमारा नाम भी लिख लें ....देखते हैं पाठकों की राय .....!!
निष्पक्ष आलोचना भी होनी चाहिये। सिर्फ खानापूर्ती के लिये टिप्पणियां ना हों संयत भाषा में कमियों की ओर भी इशारा जरूरी है। पर कहां हो पाता है संकोचवश। हम हजम ही नहीं कर पाते आलोचना।
अविनाश भाई ,आपकी आज्ञा सर माथे पर , नाम तो खुदबखुद भेजें तो ही पता चलेगा , हां यदि आप चाहते हैं तो मैं खुद ही तैयार हूं , कब कैसे कहां ये तो मुझे नहीं पता मगर कोशिश तो की ही जा सकती है और नये प्रयोग तो मेरे लिए किसी चुनौती से कम नहीं , आप भेजिए आमंत्रण , मैं और भी नए साथियों को तलाशता हूं
अजय कुमार झा
सद -विचार.
ha ha ha ha ha ha
bhai waah !
अच्छा विचार है । सिर्फ़ कुछ सुझाव देना चाहूंगा । एक बार में कम से कम एक सप्ताह के लिए जिम्मेदारी देनी चाहिए और ज्यादा चिट्ठाकार शामिल हों इसलिए सिर्फ़ एक के बजाय तीन के पैनेल को एक साथ जिम्मा दीजिए, इससे चर्चा का दायरा भी बढ़ेगा और किसी एक के व्यस्त होने पर भी सिलसिला टूटेगा नहीं ।
अजी !! नेकी और पूँछ-पूँछ....:):)
हो जाइए शुरू...
आप तो हैं गुरु...
@ अदा
करूंगा मैं नहीं
वे करेंगे सारे
दिखाएंगे नजारे
जो नए हैं
बनेंगे पुराने।
सुन्दर प्रयास है !!!
@ मुरारी पारीक
मुझे तो आपसे भी चर्चा की आस है।
अविनाशजी , यह तो बहुत अच्छी शुरूआत है ।
अच्छी शुरुआत है अविनाशजी ! हम आपके साथ हैं
अविनाश जी आप कुछ न कुछ नया सोचते और करते रहते हैं मैं बधाई दिए नहीं रह सकता हूँ.बधाई.
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विचारों का खुल गया ताला
स्वीकारता सब सच तेताला