
नवभारत टाइम्स रविवार
14 मार्च 2010 के अंक में
आदित्य मित्र ने दी है
बहुत महत्वपूर्ण जानकारी
पढ़ लें और जान लें अपने अधिकार
इमेज पर करें क्लिक और याद लें
उपर आने से रह गया है जो हिस्सा
वो नीचे है उसे भी पढ़ लें आलस मत करें
शब्द-भावों का गुम गया ताला पधारें चर्चा का खुल गया ताला
5 comments:
सरकार और प्रशासन का यह बहुत ही सराहनीय प्रयास है न जाने कितने लोग रोज इस तरह से परेशान किए जाते है अब कुछ सुधार तो होगा ही...फीडबैक की बढ़िया सुविधा जागरूक जनता का ज़रूर भला होगा..जानकारी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद चाचा जी..
बहुत आवश्यक जानकारी
अनावश्यक रूप से परेशान नही होंगे
सही जानकारी.
जानकारी के लिए शुक्रिया!
सबसे ज्यादा दिक्कत तो तब होती है जब मजिस्ट्रेट साथ होता है . बिल्कुल अंग्रेजों के जमाने के समान आपकी कोई बात नहीं सुनी जाती और जीतना आप बोलेंगे उतना जुर्माना बढ़ते जाएगा
है कोई इसका इलाज ?
Post a Comment
विचारों का खुल गया ताला
स्वीकारता सब सच तेताला