संग ठन जाये ब्‍लॉगरों की आपस में ऐसा संगठन कभी नहीं चाहूंगा (अविनाश वाचस्‍पति)

होली का मजाक न समझें बिल्‍कुल गंभीर हूं


संग ठन जाये
ब्‍लॉगरों में
और गठन चाहे
मैं ऐसा नहीं हूं।

साथ लेकर चलता हूं
अब अकेला नहीं हूं
अकेला नहीं रहने दूंगा
सबको साथ लेकर चलूंगा
सब आयेंगे साथ मेरे
मन है विश्‍वास।

समस्‍यायें सबकी साझी हैं
विश्‍वास सबका साझा है
इकट्ठे होने का अपना
एकदम नेक इरादा है।

अनेक हों नेक बनें
एक से अनेक बनें
ऐसा नहीं चाहूंगा
जरा सी भी ठने।

जिनके आने से जमे
आपस में प्‍यार बढ़े
उन्‍हें ही लाना चाहूंगा
संग ठने नहीं, जमे
गठन हो मजबूत
इरादा यही नेक है
बैरी कोई नहीं
मित्र प्रत्‍येक है।

पर आपस में
मन चटक जायें
और सुप्रभात न पायें
ऐसा कभी नहीं चाहूंगा
आप भी नहीं चाहेंगे।

जय हों प्रभात हों
अध्‍यक्ष उन्‍हें बनायेंगे
सुगंध ब्‍लॉग की फैलायेंगे
जब तक एक भी करेगा
खिलाफत संगठन की
संगठन नहीं बनायेंगे।

होली तभी मनायेंगे
जब सब मान जायेंगे
न कंप्‍यूटर तोड़ेंगे सब
दिल से दिल को जोड़ेंगे।
 
Copyright © 2009. तेताला All Rights Reserved. | Post RSS | Comments RSS | Design maintain by: Shah Nawaz