थिर हो गई पत्‍ती : दुनिया मेरे आगे में श्‍याम विमल को पढि़ए

कविता कैसी लगी
यह भी बतलाइये ?


दैनिक जनसत्‍ता दिनांक 20 मई 2010 से ब्‍लॉगहित में साभार।
 
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