हरसिंगार के फ़ूलों संग मन प्रसन्न रहता है

स्वागत है आज की चर्चा में .........कल से नवरात्रे शुरू हो रहे हैं उनकी अग्रिम बधाइयाँ स्वीकार करें .........आप सबका अध्यात्मिक बल बढे ,हर मनोकामना पूर्ण हो और आप सब इसी तरह पूरे मनोयोग से ब्लॉग लिखते रहे ..........तो आइये चलते हैं आज की चर्चा पर 









दीजिये जवाब 






फैसले कैसे कैसे


क्या हुआ ?






हरसिंगार के फूल - कहानी


कभी तो झड़ते ही हैं 






यशोधरा का पत्र बुद्ध के नाम


है कोई जवाब?




मन प्रसन्न रहता है - अनुपमा त्रिपाठी


रहना ही चाहिए






गुटबंदी ने हिंदी ब्लॉगिंग का बेड़ा गर्क करके रख दिया है


इसमें क्या शक है?





जब दिल धक् धक् करने लगे और रुकने का नाम ना ले ---


तो क्या करना चाहिए?





एक और पड़ाव


किसका?




शहीद-ए-आज़म भगत सिंह


नमन है 





नाम जप द्वारा उपासना -प्रार्थना


सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा






ये फोटो देखिए, देखते ही रह जाएंगे...खुशदीप


देखते हैं ..........





मौसम..


कब बदला?




इक क़तरा जिंदगी का................


घूँट बनाकर पी लिया होता

तो शायद कुछ देर जी लिया होता 






नारी को आगे बढ़ने में मदद करते हैं पुरूष भी



इसमें क्या शक है 

नारी बिना पुरुष की भी तो नहीं है गति 






तेरी लाडो मुन्नी मेरी...


कितनी भोली कितनी प्यारी 






कविता : कुछ मोहब्बत भरी बातें


आओ गुनगुना लें 





कैप्सूल में बंद कविताएँ


कभी तो बाहर आएँगी 






वेद और गीता के बारे में असत्य प्रचार का निराकरण....ड़ा श्याम गुप्त....


जरूर करिए 






सही निशाना


कब साधना सीखेंगे ?






हमारी मानसिकता और अनशन की प्रासंगिकता 1.2 ..........केवल राम


क्या है बताइए 






इस आस में किनारे पे ठहरा किये सदियों तलक


किस आस में ?





माही....



तू मेरा कौन वे 










अब नामकरण भी हो गया 





बालिका दिवस... कहानी




प्रश्न जायज है 















क्या देखा ?




यार ने ही लूट लिया कच्छा यार का- राजीव तनेजा

अब क्या किया जाये?








दोस्तों आज के लिए इतना ही ..........उम्मीद है पसंद आएगा ....फिर 


मिलेंगे 







25 comments:

राजीव तनेजा said...

बढ़िया लिंक्स से सुसज्जित उम्दा चर्चा

केवल राम : said...

बेहतर लिंक्स का संकलन ...आपका आभार हमारी पोस्ट को शामिल करने के लिए ....!

अभिषेक मिश्र said...

एक साथ कई महत्वपूर्ण लिंक मिले. मेरी पोस्ट को भी शामिल करने का शुक्रिया.

सदा said...

वाह ...बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स ।

सुज्ञ said...

बहुत ही विशिष्ठ लिंक मिले!! श्रमपूर्ण शोध!! आभार वन्दना जी!!

मेरे आलेख "सही निशाना" को सम्मलित करने के लिए आभार!!

Dr (Miss) Sharad Singh said...

अच्‍छे लिंक्‍स...अच्‍छी चर्चा...

DR. ANWER JAMAL said...

लाजवाब प्रस्तुति ।
अब आपके लिँक्स में से अपनी रूचि के शीर्षक पर क्लिक कर रहा हूँ और यह एक काला रहस्य नहीँ है , मेरी टिप्पणी भी उस पोस्ट पर मिलेगी .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सुन्दर लिंक्स का समायोजन ..आभार

RAJEEV KULSHRESTHA said...

बेहतर लिंक्स का संकलन ...आपका आभार
लाजवाब प्रस्तुति ।

अजय कुमार झा said...

वाह शानदार वन लाइनर है जी ..बहुत सुंदर बहुत खूब

Dr.J.P.Tiwari said...

सभी संवेदी, सुधी पाठकों और समीक्षकों को नमस्कार और उनकी बहुमूल्य टिप्पणी के लिए आभार.

मित्रों,
इस ऐतिहासिक चरित्र पर लेखनी चलाते दर लग रहा था. बहुत डरते-डरते यशोधरा को एक आधुनिक नारी, अपने कर्त्तव्यों और अधिकारों के परत जागरूक नारी के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है. और इसे नारी सशक्तिकरण में एक आहुति क रूप में ही देखा है. अपना गुण-दोष स्वयं दिखायी नहीं पड़ता. जो देख लेते हैं वे बहुत पहुचे हुए होते हैं , गुप्त जी की यशोधरा कुलीन परिवार की अत्यंत संयमी बहू है जो किसी के भी समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं करती. बहुत हुआ तो प्रकृति से, छोटे से पुत्र से वार्तलाप कर लेती है जिसमे अंतर का दर्द भी छलक आता है. उस यशोधरा में शिकायत और उपालंभ के शब्द नहीं के बराबर है. इस रचना में यशोधरा एक आधुनिक नारी है जो अपने अधिकारों के प्रति सजग और सतर्क है. तथा सीधे -सीधे अपने पाती से ही पूछती है. शालीनत और संयम का उलंघन यहाँ भी नहीं है, लेकिन तेवर अवश्य ही बदला-बदला है. एक राज की बात बताऊँ इस रचना को मैंने संगीता जी से अवलोकित करा लिया था. उनकी सहमति के बाद ही ब्लॉग पर पोस्ट किया है. उनका बहुत - बहुत आभार.

Dr.J.P.Tiwari said...

Vandana ji

NamaskarI

कई महत्वपूर्ण लिंक मिले. मेरी पोस्ट को भी शामिल करने का शुक्रिया.

गगन शर्मा, कुछ अलग सा said...

माँ की कृपा सब पर बनी रहे।

प्रवीण पाण्डेय said...

आज के बहुत सूत्र तो पढ़े हुये निकले।

सुमन'मीत' said...

bahut sundar vandana ji..meri post ko sthan dene ke liye shukriya

अशोक बजाज said...

VAH ....

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति वाह!

ZEAL said...

Many thanks to you Vandana ji .

ASHA BISHT said...

Har kshetra se jude vibhinn vicharon ko padne ko mila. bahut achchha laga.

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग said...

Bahut Achhi rachna

mahendra srivastava said...

क्या बात है, बहुत सारे लिंक्स, सभी एक से बढकर एक

डा० व्योम said...

अनेक ब्लाग्स के लिंक देकर आप एक ही जगह पर सभी को देखने, पढ़ने का सुअवसर प्रदान कर रहे हैं। हिन्दी में इतने ब्लाग लिखे जा रहे हैं यह सुखद है। कभी इनके लिंक भी दीजियेगा-
www.navgeet.blogspot.com
www.haikudarpan.blogspot.com
www.balpratibimb.blogspot.com
www.haikukosh.blogspot.com
www.vyomkepar.blogspot.com
www.hindiblogkosh.blogspot.com

डा० व्योम

V.P. Singh Rajput said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.

Unlucky said...

You have an awesome blog! I'm going to enjoy reading it.

India is a land of many festivals, known global for its traditions, rituals, fairs and festivals. A few snaps dont belong to India, there's much more to India than this...!!!.
Visit for India

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

अत्यंत सुन्दर लिंक से सजी प्रस्तुति...सादर !!!

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