नमस्कार , कुछ खास चिट्ठे ले कर आई हूँ , आशा है पसंद आयेंगे ….चिठियाना-टिपियाना सुलह वार्ता from विचार by मनोज कुमारउस दिन छ्दामी लाल की अनुपस्थिति में चिठियाना और टिपियाना मिल्लेनियम पार्क की एक बेंच पर गंगा के किनारे मिले और उनके बीच संवाद का आदान- प्रदान शुरु हुआ।चिठियाना – ... और यार टिपियाना बताओ भाभी जी के साथ जो तुम्हारी खट-पट हुई थी वह मिटी कि नहीं। टिपियाना - हां यार बड़ी मुश्किल से मामला शांत हुआ। "मंजिल की तलाश में"from " यादें " by amrendra "amar"मेरी मंजिल!! न ये जिंदगी है .... न ये आसमां........, हर सुबह दौड़ता हूँ फिर भी मंजिल की तलाश में !!!!!!!! बच्चों के साथ..............सीखने की नई शुरूआत....!from परवाज़....शब्दों के पंख by डॉ॰ मोनिका शर्माबच्चों के साथ हम बड़ों के लिए भी सीखने समझने की एक नई यात्रा आरंभ होती है। एक ऐसी यात्रा जो हमें फिर से बचपन में लौटा ले जाती है। जाने दो मुझे, आज जाने दोfrom मैं घुमन्तू by Anu Singh Choudharyबजने दो आज फोन की घंटियां मर भी जाए तो क्या है मर जाए एक और डेडलाईन। गुज़र जाने दो घंटों को पटरियों पर दौड़ती रेल की तरह। बेटी बचाओ अभियान (गीत – 3)from अरुण कुमार निगम (हिंदी ) by अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com)आन बान और शान है बेटी गीता और कुरान है बेटी. गर्व करें अपनी बेटी पर जन गण मन का गान है बेटी. जन-गण-मन --- ललित शर्माfrom ललितडॉटकॉम by ब्लॉ.ललित शर्माराज्य स्थापना दिवस की 11वीं वर्षगांठ के अवसर आज राजभवन के दरबार हाल में राज्यपाल श्री शेखर दत्त ने छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील स्वरूप एवं गौरवशाली परंपरा को दर्शाने वाली तथा राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' पर आधारित लघु फिल्म का विमोचन किया। स्वयंनामा-6from विशाल.......दिल की कलम से by विशालतआल्लुक तर्के तआल्लुक के बाद भी तआल्लुक बचा रहा तू बेशक बचा रहा मैं नाहक बचा रहा इतिहास की धरोहर "रोम".(.पार्ट २ )from स्पंदन SPANDAN by shikha varshneyबचपन से सामान्य ज्ञान की पुस्तक में पढ़ते आये थे कि दुनिया का सबसे छोटा देश है"वेटिकेन सिटी " तब लगता था छोटे से किसी द्वीप या पहाड़ी पर छोटा सा देश होगा. मैं और मेरी कवितायेँfrom ehsas by Amit Chandraतुम्हारे बिना मैं अधूरा हूँ और मेरे बिना तुम । एक तुम ही तो हो जो हर वक्त मेरे साथ रहती हो । मेरी तनहाइयों में भी मैं सजग चिर साधना ले !from राजभाषा हिंदी by मनोज कुमारपिछले लेखों में महादेवी जी के बचपन के रंगों का समेटते हुए हमने उनकी वय के उस अध्याय को भी जाना जहाँ महादेवी जी ने अपने बाबू जी को विवाह ना करने का अटल निर्णय सुना दिया. जिस रोज़.....from मेरे जज्बात by SANJUतो आँखों में अश्क उतर आयेंगे उस रोज़ तेरी कोई ग़ज़ल लेकर आयेंगे जिस रोज़ मन......from bas yun...hi.... by ***Punam***मन...... न जाने कितनी बार हुआ टुकड़े-टुकड़े ! इतना कि..... कागज़ की मानिंद बिखर गया हवा में ! प्रेम : नर्मदा किनारेfrom गुलमोहर by राजेश उत्साही।।एक।। मेरे तुम्हारे बीच का फासला जैसे सात समन्दर पार की दूरी हम हैं आदम की संतानfrom अनुभूतियों का आकाश by कुश्वंशगयी दिवाली घर आँगन में दिए जलाकर दिल के पिछले कोने के सब गम सहलाकर महल, झोपडी, गली, मोहल्ला बिखरी खुशियों का हो हल्ला मैं हर वो शब्द ढूढती हूँ......!from 'आहुति' by sushma 'आहुति'मैं हर वो शब्द ढूढती हूँ.... जो तुम्हारे शब्दों के साथ ढल सके...... मैं मिल सकू या न मिल सकू....पर मेरे शब्द तो तुम्हारे शब्दों से मिल सके.... कुछ दर्द...अलग सा ..!from JIGYASA by ASHA BISHTमेरे गाँव की मिट्टी शायद सोचती होगी ताउम्र क्यूँ हूँ मैं इस छोर पर जिसे अंतिम कहते हैं छोड़ जाते है सब सिर्फ कुछ जाते पदचिन्ह कर जाते है पलायन कभी सुख के बहाने कभी समृद्धि के बहाने... "कंकरीटों का यहाँ जंगल उगाया है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")from उच्चारण by डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)जलाया खून है अपना, पसीना भी बहाया है। कृषक ने अन्न खेतों में, परिश्रम से कमाया है।। दिलकी राहें.......from simte lamhen by kshamaबहोत वक़्त बीत गया,यहाँ किसीने दस्तक दिए, दिलकी राहें सूनी पड़ीं हैं, गलियारे अंधेरेमे हैं, दरवाज़े हर सरायके कबसे बंद हैं !! राहें सूनी पडी हैं॥ दिया और बाती हमfrom मेरे अनुभव (Mere Anubhav) by Pallaviजाने क्यूँ आज सुबह से ही यह गीत मेरी ज़ुबान पर चढ़ा हुआ था और में बस यही गुनगुनाए जा रही थी। तब मन में यूंहीं एक ख्याल आया कि क्यूँ ना इस पर भी एक पोस्ट लिखी जाये सो लिख डाली।Jजैसा कि इस पोस्ट के शीर्षक से ही पता चल रहा है कि यह मेरी पोस्ट का नाम होने के साथ-साथ एक टीवी सिरियल का नाम भी है। देसिल बयना – 103 : रविहु की एक दिवस में तीन अवस्था होय... !from मनोज by करण समस्तीपुरीस्वस्ति श्री पत्र लिखा बंगलुरु से करण समस्तीपुरी के तरफ़ से छट्ठी मैय्या और बाबा सुरुजदेव के चरण-कमलों में सादर प्रणाम पहुँचे। व्रती महिलाओं को शुभकामनाएं और बिलागर बंधु-बांधवों को छ्ट्ठी मैय्या का आशीष। ये आपकी धरोहर है …by वन्दना गुप्ता गर्भनाल का ६० वाँ अंक खास है ..........ये प्रवासी भारतियों का हिंदी के प्रति योगदान को समर्पित अंक है और मेरे पास जिन जिन ब्लोगर्स और लेखकों की जानकारी थी उनके लिंक मैंने देने की कोशिश की है इस अंक में .......... मनfrom दुनिया रंग रंगीली by Minakshi Pantमन के आँगन में बहारों ने डाला डेरा | माली के चेहरे में मुस्कुराहट का सवेरा | आज के लिए बस इतना ही …. अभी इजाज़त दीजिए ..फिर मिलेंगे ---संगीता स्वरुप |

22 comments:
बहुत ही अच्छे लिंक्स दिये हैं आपने ...आभार ।
बहुत सुन्दर और सार्थक लिंक्स संजोये हैं……………ज्यादातर पढ लिये हैं। बढिया चर्चा।
बहुत सुंदर चर्चा
Sabhi link bahut hui acche hai ,aapne hume bhi apne gher me jageh di bahut accha laga.aapse gujaris hai ki aise hi apna sneh banaye rahiga......bahut bahut shukriya
sarthak charcha hetu hardik aabhar .
बहुत बढ़िया लिंक्स.बहुत आभार.
सराहनीय प्रयास धन्यवाद
very nice links, thanks
आभार!
अच्छा संकलन !
मेरी पोस्ट को यहाँ स्थान देने के लिए आपका शुक्रिया साथ ही बहुत ही अच्छे लिंक दिये हैं आपने.... आभार
तमाम रंगों से सजी शानदार लिंक्स..
मेरी प्रविष्टि को स्थान देने हेतु आपारधन्यवाद ..
Badhiya links! Aaj raat ko baith ke padhungee!
Meri post ko yahan sthaan diya....tahe dil se shukriya.
नमस्कार दीदी आज आपने फिर से मेरी रचना को खूबसूरत सम्मान दिया मैं आपकी दिल से आभारी हूँ | बहुत - बहुत शुक्रिया |
सुंदर संकलन.मुझे भी सम्मिलित करने हेतु आभार.
अच्छे लिंक्स .. सुंदर संकलन !!
शुक्रिया संगीता जी।
यह चर्चा अपने रंगों की छटा बिखेर रही है।
बहुत सुन्दर लिंक्स हैं…
अच्छी लिंक्स के लिए धन्यवाद |
आशा
bhaut hi khubsurat charcha..... bhaut- bhaut dhanyewaad mujhe is charcha me samil karne ke liye....
आपके पोस्ट पर आना सार्थक सिद्ध हुआ । पोस्ट रोचक लगा । मेरे नए पोस्ट पर आपका आमंत्रण है । धन्यवाद ।
Post a Comment
विचारों का खुल गया ताला
स्वीकारता सब सच तेताला