निडर है वह

मन चाहे
नेता बनूं
तन कर चलूं

मिले चाहे गालियां
बजाएं सब तालियां
जरूरी नहीं

कुकर्मों को मिलेंगी
मिलनी चाहिएं
चटनी पिसनी चाहिए

बनायें मुझे नेता
नेता यानी लीडर
लीडर सदा निडर

8 comments:

Kajal Kumar said...

इन सबके लिए राजनीति में जाने की ज़रूरत तो नहीं ही लगती :)

संतोष त्रिवेदी said...

फिलहाल भी तो हो नेता,
ब्लॉगरी के अभिनेता,
ऊपर वाला एक हाथ से देता
सौ हाथों से लेता नेता !
ऐसे में बनना है नेता,
राम-राम मैं भी कर लेता !!

प्रवीण पाण्डेय said...

निडर लीडर, वाह वाह।

शिखा कौशिक said...

badi kathin hai dagar neta ki .

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ said...

बहुत सुन्दर

Sadhana Vaid said...

अद्भुत अभिलाषा है ! चटनी पिसवाने के लिये नेता क्यों बनना चाहते हैं ! हाथ में जागृति की मशाल थामिये !

वाणी गीत said...

निडर लीडर या है या लीडर निडर है !

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर

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