सिर्फ हंसने के लिए
नहीं होता है व्यंग्य
हंसना है तो सुनिए
हास्य व्यंग्य
या चुटकुले
किसी ने भी हों गढ़ें
पर आप उन्हें पढ़ें।
व्यंग्य सुनेंगे तो
हंसी तो हो जाएगी गायब
तालियां भी बजाना भूल जायेंगे
सुनने वाले जनाब
कसमसाएंगे, तिलमिलाएंगे
कसमसाना तो ठीक समझ आता है
पर तिल किस में मिलायेंगे
या बनायेंगे तिल का ताड़।
बहरहाल, ताड़ पर नहीं उपजते हैं तिल
तिल मिल जाएं खूब सारे
तो नजर आते हैं
एक अकेले का तो
पता भी नहीं चलता
तिल का कौन सा होता है पत्ता
वो भी हिलता है या नहीं हिलता।
इतना तो तय है
जितने तिल कसमसायेंगे
उतने अर्जित विचार
आपके मन मानस से बाहर आयेंगे
और हमें नहीं चाहिए तालियां
क्योंकि व्यंग्य के नाम पर
देते हैं सब बुराईयों को गालियां
गालियों पर बजाना-बजवाना तालियां
सभ्यता के लक्षण नहीं हैं।

5 comments:
बहुत सुंदर,
इतना तो तय है
जितने तिल कसमसाएगे
उतने अजित विचार
आपके मन मानस से बाहर आएंगे
बिल्कुल सच
सुन्दर प्रस्तुति.
व्यंग की परिभाषा ही हास्य की परिधि में धकेल दी गयी है।
बेहतरीन अभिव्यक्ति ।
विशुद्ध व्यंग्य की गरिमा ही कुछ और है!
सटीक भाव लिए हुए सार्थक रचना!
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विचारों का खुल गया ताला
स्वीकारता सब सच तेताला