नमस्कार , ले आई हूँ आज के कुछ खास चिट्ठे आपकी नज़र … जो मुझे नज़र आए …चलते हैं सीधे लिंक्स पर ---हम ग़ज़ल कहते नहीं आत्मदाह करते हैं - डा. विष्णु विराट from ठाले बैठे by Navin C. Chaturvediलोग सुनते हैं और वाह वाह करते हैं।इससे लेकिन दिलों के ज़ख्म कहाँ भरते है। हाथ रखिये ज़रा चलते हुए शब्दों पे 'विराट'। हम ग़ज़ल कहते नहीं आत्मदाह करते हैं।। पुरुष हूँ , ना समझो पत्थर ! हम भी दिल रखते हैं ......>>> संजय कुमारfrom " जीवन की आपाधापी " by संजय कुमार चौरसियाअरे तुम तो बड़े ही पत्थर दिल हो , लगता है तुम्हारे अन्दर तो संवेदना या दिल नाम की चीज बिलकुल भी नहीं है लगता है तुम्हें मुझसे या बच्चों से जरा भी प्रेम नहीं है ! मैंने तो आज तक कभी तुम्हारी आँख में एक आंसू तक नहीं देखा वक्त तो लगा पर ये गुरूर ...जाता रहाfrom कागज मेरा मीत है, कलम मेरी सहेली...... by Vandana Singhवक्त तो लगा पर ये गुरूर ...जाता रहा अपनी तहरीरों का सब नूर ...जाता रहा इक इक करके यूं टूटे वो सारे भरम अफ्कारों का भी अब सुरूर... जाता रहा सजल है कितना सवेरा !from राजभाषा हिंदी by मनोज कुमारपांचवी काव्य-कृति 'दीपशिखा' को काव्यमय चित्र या चित्रमय काव्य अथवा 'चित्रगीत' की संज्ञा दी जा सकती है. इसके प्रत्येक गीत की पृष्ठभूमि के रूप में एक चित्र अंकित है, जो काव्योत्कर्ष की चारुता बढ़ाने में समर्थ है अजीब जिद है...from LIFE by Anupriyaअजीब जिद है... ना कहने देते हो, ना चुप रहने देते हो. ना ख़ामोशी में आराम, ना शिकवे में है सुकून, बरगदfrom चला बिहारी ब्लॉगर बनने by चला बिहारी ब्लॉगर बननेकमाल के बुजुर्ग थे ऊ भी. घर के ओसारा में एगो चौकी पर अपना पूरा दुनिया बसाए हुए, उसी में खुस. घर का बाल-बच्चा दुतल्ला मकान बना लिया, मगर उनको तो ओही चौकी पर दुनिया भर का सुख हासिल था सिलसिला.....!!!!!!!from anupama's sukrity. by अनुपमा त्रिपाठी...देख रही हूँ ... शबनमी सर्द रात.. आती हुई ... और फिर .... और गहराती हुई ... मुझे बदनाम करे...from Soz-e-dil by •๋:A∂itya™©जो खुले ज़ुल्फ़ तेरी तो, सहर को शाम करे, तेरी साँसों से ही गुल, ख़ुश्बू का इंतज़ाम करे. बाद मुद्दत के हैं आई, ये, वस्ल की घड़ियाँ, वक़्त से कह दो, खुद को, ज़रा ख़िराम करे. ."मुझे तुम साथ पाओगे."from आगंतुक by सुरकण्डा के आँचल सेकभी जो जिंदगी की उलझने, तुमको ही उलझा दें .....!!! हिन्दी ब्लॉगिंग में राष्ट्रीय पुरस्कार पहली बार : 14 नवम्बर 2011 को विज्ञान भवन दिल्ली में दिया जाएगाfrom नुक्कड़ by अविनाश वाचस्पतिप्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती. तभी तो पाँच वर्षीया नन्हीं ब्लॉगरा अक्षिता (पाखी) को वर्ष 2011 हेतु राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (National Child Award) के लिए चयनित किया गया है. वह संदूकची ......from 'विचार प्रवाह' by PRIYANKA RATHOREताड़ पर रखी वह संदूकची धूल और जालों में सनी फिर नजर आई .... ख्यालों में गोते लगाने के लिए एक नदीfrom Yeh Mera Jahaan by गिरिजा कुलश्रेष्ठमुझे क्या पता कि किधर है ढाल और किस बनावट की यह धरती है मैं तो इतना ही जानती हूँ कि एक नदी है जो सिर्फ तुम्हारी ओर बहती है । कैक्टस और गुलाबfrom Kalam Ka Sipahi Rajesh Tripathi कलम का सिपाही by Rajesh Tripathiबैंक की नौकरी का पहला दिन। रोज सुबह आठ बजे जगने वाली नीलम चौधुरी आज पांच बजे ही उठ गयी। नयी सलवार और कुर्ता में इस्त्री करते देख मां ने कहा, 'यह तो नयी है। फिर इस्त्री?' 'रखे रखे दब कर गुंजट गयी थी मां।' सियाहीfrom लहरें by Puja Upadhyayनिब का आगे का नुकीला हिस्सा टूटता है और धारदार स्टील उसकी ऊँगली में धंस जाता है. बेहद तेजी से खून बहता है और लड़की अचंभित सी गहरे लाल रंग के खून में मिलती काली स्याही देखती रह जाती है. क्या रखा है...किनारे में!from अनुशील by अनुपमा पाठककई बार सोचा कि बात हो कोई भली सी देने को सौगात हो पर हमेशा यही हुआ कभी अवसर नहीं कुछ साँस बची है जीने को...from अभिव्यंजना by Maheshwari kaneriकुछ साँस बची है जीने को ,जी भर मुझ को जीने दो ह्रदय तार के स्पंदन को ,आज मुझे तुम सुनने दो टूटे बिखरे सपनों को मैं सहेज रही थी जीवन भर आशा की इस बगिया में दो बूँद बारिश का गिरने दो तूफान जा रहे थे उनके साथ नाव में..from ये वक्त गुजर जायेगा by atulkushwahaमैं जिस राह से जाऊं वो ही तेरा भी रस्ता हो, सुनाई दे मुझे हरपल जो दिल तेरा धड़कता हो। मेरे हमराह बस मेरी यही छोटी सी ख्वाहिश है, तेरी बाहों में दम निकले, कफन तेरा दुपट्टा हो।। – अतुल "शाकाहारी जीव की, गर्दन पर तलवार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")from उच्चारण by डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण)परम्पराएँ मिन्न हैं, फिर भी हैं सब एक। कोई खोया खा रहा, कोई खाता केक।। लघुकथाfrom सृजन-यात्रा by सुभाष नीरव''सुनो जी, अपनी मुन्नी अब खड़ी होकर चलने की कोशिश करने लगी है।'' पत्नी ने सोते समय पास सोयी हुई मुन्नी को प्यार करते हुए मुझे बताया। ''पर, अभी तो यह केवल आठ ही महीने की हुई है!'' मैंने आश्चर्य व्यक्त किया। बड़ी-बड़ी काली आँखों के सपने...from मेरे सपनों की दुनिया by मितालीवो करती थी मुझसे अपने सपनों की बातें मेरे सीने से लिपट कर, और चौंधियां जाती थी जब टेढ़े-मेढ़े उल्टे-सीधे.......from mridula's blog by mridula pradhanजब टेढ़े-मेढ़े उल्टे-सीधे और उलझे हुए..... रिश्तों की कौमें निकलकर , एक -दूसरे की गवाही डायरी के पन्नेfrom सिर्फ तुम....... by siddharthकल अचानक याद आई वो डायरी जो रखी थी मेज की दराज में आज भी संजोयी रखी थी आज के लिए बस इतना ही …नमस्कार …संगीता स्वरुप |

17 comments:
bahut acche links sangeeta ji....isme meri post ko shamil karne ke liye aabhar....
बेशुमार सुंदर लिंक्स.....बहुत अच्छी चर्चा ...आभार मुझे स्थान देने के लिए ....!!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
बहुत ही सुन्दर लिंक्स लगाये हैं ………काफ़ी पढ लिये हैं।
बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति , बधाई.
अच्छा सनाकलन.. आभार!!
Thank u..Sangeeta ji...amazing links...
सुन्दर प्रस्तुति!
Thanks for including anusheel!
काफी कुछ मिल गया पढ़ने को .आभार.
कई पढ़ आये हैं, कई पढ़ने जा रहे हैं।
bahut sunder links se sajaya aapne tetala ko.
ek baat kahna chahungi...
सजल है कितना सवेरा !
from राजभाषा हिंदी by मनोज कुमार...
aap shayad janti hongi ki ye titled post kiske dwara likhi gayi hai...kripya dhyan de.
अनामिका जी ,
जो पोस्ट जिस टाईटल से रीडर पर आती है वही लिंक लगाया जाता है .. यहाँ मैं कुछ नहीं करती .. जो लोग वहाँ पहुंचेंगे स्वयं जान लेंगे कि किसकी लिखी हुई है ..
अच्छे लिंक्स से सजी चर्चा।
बेहतरीन प्रस्तुतियाँ...
♥
आदरणीया संगीता जी
सस्नेहाभिवादन !
तेताला की ख़सियत के अनुरूप आजके लिंक बहुत अच्छे हैं …
बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
अच्छी लिंक्स के लिए बधाई |
आशा
सुंदर लिंक्स से सजी उपयोगी पोस्ट। ठाले-बैठे को स्थान देने के लिए आभार।
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विचारों का खुल गया ताला
स्वीकारता सब सच तेताला