दोस्तों
आज सबसे पहले आप सबको बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं .........आज की चर्चा का खास आकर्षण तो बाल दिवस की पोस्ट्स ही हैं मगर उसके साथ कुछ मिली जुली तो कुछ धार्मिक पोस्ट्स का भी समावेश किया है ताकि एक ही जगह त्रिवेणी का आनंद लिया जा सके .........इसलिए आज की चर्चा तीन रूपों में आपके समक्ष प्रस्तुत है
चलिए अब चलते हैं रंग बिरंगी चर्चा पर
तो दोस्तों आज की चर्चा को यही विराम देती हूँ ..........फिर मिलेंगे इसी तरह एक नए रंग के साथ
आज सबसे पहले आप सबको बाल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं .........आज की चर्चा का खास आकर्षण तो बाल दिवस की पोस्ट्स ही हैं मगर उसके साथ कुछ मिली जुली तो कुछ धार्मिक पोस्ट्स का भी समावेश किया है ताकि एक ही जगह त्रिवेणी का आनंद लिया जा सके .........इसलिए आज की चर्चा तीन रूपों में आपके समक्ष प्रस्तुत है
बालदिवस मुबारक हो ....!!!!!.....बच्चों का एक ही दिन तो आता है जो सबके मन को भाता है
चंदा मामा दूर के /बच्चों की कहानियाँ..............एक ऐसी कहानी जो हर युग में हर काल में हमेशा अपने होने का अहसास कराती रही
बाल दिवस की शुभकामनाएँ!..........प्यारे बच्चों की प्यारी बातें
-तरक्की का नया नज़रिया ....पढाई आवश्यक नहीं ......डा श्याम गुप्त ............ये कैसा नजरिया है ?
बालदिवस..........एक दिन में सिमटता बचपन
बड़ा चतुर होता है,बाल सुलभ मन............तभी तो करता है बातें निश्छल
छोटू..............हर जगह पाया जाने वाला पात्र
एस के पाण्डेय की बाल-दिवस विशेष बाल कविता - चालाक मेमना...........ये भी कुछ कहता है
चलिए अब चलते हैं रंग बिरंगी चर्चा पर
छूटना... देखें किस किस का ?
मेरा लिखा रह जायगा...........याद तुम्हें कभी आएगा
हंसी को आजाद करते हैं .... !!!हम भी तुम्हें याद करते हैं
वो नखलिस्तान ....एक बेचारगी
सकारात्मकता पर प्रश्न कहाँ !...........सही कहा
लावारिस...........कौन ?
पतिव्रता (?) नारियाँ !..............एक जटिल प्रश्न
कबूतर को दाना...........आज कौन देता है
एक शानदार व्यक्तित्त्व का शानदार जीवन सफ़र --.......जरूर पढ़िए
आधुनिक पगडंडियां मेट्रो हैं (कविता)...........अच्छा हमें तो पता नहीं था
संघर्ष ...........आखिर कब तक ?
आग से किसने गढ़ा है चांद..........फिर क्यूँ मचलता है चाँद
वो सुबह कभी तो आएगी!...........जरूर आएगी
वो ज़फर मीर ओ ग़ालिब की ग़ज़ल-सी लड़की.............वो यहीं कहीं आस पास से गुजरती लड़की
"आज बन गये सब व्यापारी" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")..........बस यही है दुनियादारी
प्रेरक प्रसंग-11 : नियम भंग कैसे करूं?...........करना भी नहीं चाहिए
नाटक- गालिब-ए-आजम और मैं...........फिर क्या हुआ ?
और लीजिये हाजिर हैं कुछ धार्मिक पोस्ट्स
सामवेद से संदेश-सत्य मनुष्य की जीभ से टपकता है...........इसमें क्या शक है .....पहचानने वाली नज़र होनी चाहिए
अब अकेला रह गया हूँ...........कल भी अकेला ही था और आज भी बस समझा आज है
मेरा कंठ , कृष्ण की सरगम ............गीत नए ये गाता है
किसको मंगल गीत सुनाएं..........श्याम तुम क्यों न आये
आताताइयों के इस समाज में..........आखिर कैसे जिए कोई
यह गीता का ज्ञान.............जीवन सन्देश दे गया
कुरुक्षेत्र …. प्रथम सर्ग ( भाग – 1 )...........रोज खड़े हैं कुरुक्षेत्र में सभी अपने अपने
लौट आओ.. मेरे देवता !............कब से पुकारे तुम्हारी राधा
मेरा पथ सुंदर करने को ............कभी तो दरस दिखायेंगे, श्याम कभी तो आयेंगे
वृन्दावन- धाम.............जिसकी महिमा है अपार
आनंद का ये स्वाद कहाँ से आता है...........जो खुद आनंद का दाता है
तो दोस्तों आज की चर्चा को यही विराम देती हूँ ..........फिर मिलेंगे इसी तरह एक नए रंग के साथ

20 comments:
वंदना जी ...इतने सारे बेहतरीन लिंक्स का चयन आपने किया ...जिनमें मेरी रचना को भी शामिल करने के लिए आभार ।
आज का पढने का कोटा मिल गया ..आभार ..
बहुत खूबसूरत प्रस्तुति |वन्दना जी आपका आभार
विबिन्न वर्ग के लिंक्स का सुंदर चयन।
अच्छे लिक्स
वाकई वंदना जी! आप बहुत मेहनत करते हैं लिंक्स का चयन करने में ..बहुत सुंदर प्रस्तुतियाँ हैं आज की और मुझे भी स्नेह देने के लिए आभार !
सुन्दर सूत्र....
सादर आभार..
बड़े ही पठनीय सूत्र।
bahut acche links...isme meri post ko shamil karne ke liye bahut bahut dhanyabad...aabhar
pooraa aanand liyaa trivenee kaa
badhaayee
त्रिवेणी का आनंद लिया!
सुन्दर प्रस्तुति!
बहुत अच्छी प्रस्तुति !
बहुत कुछ होता हैं जिन्दगी में,
पर कुछ खास ही पल याद रह जाते हैं,
जिन्दगी तो धीरे-धीरे बीत जाती,
कुछ पल जिन्दगी भर साथ रह जाते हैं,
उन कुछ खास पलों में आज का ये पल मेरे लिए आपने खास बना दिया,
आपने अपने इसे तेताला पर कबूतर का दाना का रहस्य सबको बता दिया,
badhiyaa
यह लिंक्स पगडंडियां ही हैं वंदना जी।
Nice ...
bahut acchhe link sajaye.
aabhar meri rachna ko yahan sthan dene k liye.
इस सरस त्रिवेणी में भीग कर मन आनंदित हो गया .अभी पूरी पढ़ नहीं पाई लेकिन इन धाराओँ में डूबने का सुख कई दिनों तक उठाऊँगी -आपने मेरी कविता को भई स्थान दिया , आभारी हूँ .
बाल-दिवस पर इस नई पीढ़ी का हार्दिक अभिनन्दन !
अच्छे लिंक्स !
कई मनभावन लिंक्स सजी है यहाँ |बहुत खूब |
आशा
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विचारों का खुल गया ताला
स्वीकारता सब सच तेताला