दरिया से न समंदर छीन....जाने फिर कभी हम ह़ो ना ह़ो..

दोस्तों आप सबका स्वागत है आज के कुछ चुनिन्दा लिंक्स के साथ..........जैसे ही शुरू में लिंक्स देखे तो मन बन गया आज कुछ लिंक्स आप सबको भी  पढवाए जायें सभी एक से बढ़कर एक हैं .......तो चलिए फिर आज की चर्चा की तरफ .........







है प्रेम जगत में सार और कुछ सार नहीं.........अब इसके आगे क्या कहा जाये 



एक घूंट में ....पी किया सारा गरल 



दरिया से न समंदर छीन...........चल आग में तू भी उतर 



दिमाग उसका चलता है.............और क्या क्या चलता है



कविता : सजा............आखिर कब तक ? 



बस तुम नहीं हो!............न रहा जीने में मज़ा 



किताबों की दुनिया - ६३.............जो खुद बोलती हैं 




सिर्फ सुनना लाज़मी है...............बेजुबानों  को कब जुबान मिली है 



अमर स्पर्श............नैनो का नैनो से 



पार वह उतर गया............जिसने जीवन का रहस्य जान लिया 



अष्टावक्र गीता वाणी रहस्य.............तू और मैं का भेद जहाँ मिट गया 



शिखर पर बैठे हुए - ये किसके चहरे हैं ............शायद कुछ तेरे और कुछ मेरे हैं 



2 मिनट में, अपना ब्लॉग गूगल के चंगुल से बचाएँ...........ये जानना तो बहुत जरूरी है



सर्दी में अस्थमा...........जानिए बचने के उपाय 



यही वो धड़कता दिल है .............जिसमे कभी तुमने आशियाँ बनाया था 



कुरुक्षेत्र …. प्रथम सर्ग ( भाग – 2 ) रामधारी सिंह ‘दिनकर ...........न जाने वरदान या अभिशाप किसका था ये कुरुक्षेत्र 



आओ, सभी हाथ बढाएँ!.............कुछ कदम मिलकर बढाएं 



कोई कुछ तो कहे!...........कैसे जियें अब हम 



दो गरम कतरे..........यूँ ही तो नहीं ढलके होंगे



मन की विकलांगता.............आखिर कब तक?




साथियों आज के लिए मेरे ख्याल से इतना काफी है ..........फिर मिलेंगे तब तक आप इनका आनंद लीजिये


19 comments:

सदा said...

बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स दिये हैं ...आभार ।

Mridula Harshvardhan said...

Thank u for including my creation.

Rest all links are also very good nd informative

Regards

Naaz

बी एस पाबला BS Pabla said...

शुक्रिया, जानकारी देती पोस्ट साझा करने के लिए

Rajput said...

सब कुछ एक ही जगह मिल जायेगा , बहुत अच्छा
जरा तेताला का मतलब समझाएं

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर पठनीय सूत्र।

कुमार राधारमण said...

आज की चर्चा में ऐसे कई लिंक हैं,जो दूसरे मंचों पर अनुपलब्ध हैं। न जाने कैसे रह गए ध्यानाकर्षण से।

'उदय' said...

bahut sundar ...

'उदय' said...

aabhaar ..............

Udan Tashtari said...

आभार इन लिंक्स का!!

मनोज कुमार said...

लिंक्स का चयन उत्तम है।

"जाटदेवता" संदीप पवाँर said...

बेहतरीन लिंक

RAJEEV KULSHRESTHA said...

बहुत ही अच्‍छे लिंक्‍स आभार

आशा said...

अच्छी लिंक्स के लिए धन्यवाद
आशा

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

अच्छी चर्चा

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...






तेताला के समस्त् प्रियजनों
सहित
आदरणीया वंदना जी
सस्नेहाभिवादन !

एक बार फिर बहुत श्रम और लगन से महत्वपूर्ण लिंक्स संजो कर बहुत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है आपने…

आभार
शस्वरं
को मान देने के लिए…

…और मुझे आपका स्नेह , सहयोग और आशीर्वाद निरंतर मिलता है यह मेरा सौभाग्य है ।

मंगलकामनाओं सहित…
- राजेन्द्र स्वर्णकार

रंजना [रंजू भाटिया] said...

bahut bahut shukriya ...badhiya links ..

धर्मेन्द्र कुमार सिंह ‘सज्जन’ said...

वंदना जी, बहुत मेहनत से बड़े ही खूबसूरत लिंक्स इकट्ठे किए हैं आपने। आपको कोटिशः साधुवाद और मुझे स्थान देने के लिए आभार।

vijaywebmaster89@mail.com said...

उतम लिंक चयन
History OF Panipat

Unlucky said...

Your post is great. You are the best blogger I have ever seen.

From everything is canvas

Post a Comment

विचारों का खुल गया ताला
स्‍वीकारता सब सच तेताला

 
Copyright © 2009. तेताला All Rights Reserved. | Post RSS | Comments RSS | Design maintain by: Shah Nawaz