कुछ चिट्ठे …. आपकी नज़र .. हाँ या ना … ? .. ?

नमस्कार , आज के खास चिट्ठे ले आई हूँ एक बार फिर …



दिनेश राय द्विवेदी जी की --   
'हाँ' या 'ना' ... ? ... ? ... ?
 
अनुपमा त्रिपाठी जी का विरह वर्णन --

!कागा कब ऐहौं मोरे द्वारे


प्रतिभा सक्सेना जी की प्रार्थना --
अंतर्यामी से

डा० शरद सिंह बता रही हैं खजुराहो की मूर्तियों के बारे में --

मिथुन मूर्तियों का रहस्य


डा० दिव्या पूछ रही हैं ---

क्या अनशन व्यर्थ गया ?


राजीव तनेजा जी कह रहे हैं --

चढ जा बेटा सूली पे


उदय वीर सिंह जी मन के भावों को समेटे हुए कह रहे हैं --विश्वास बने

कबीर जयंती पर मीनाक्षी जी लायी हैं --

नूतन व पुरातन का समन्वय


राम कृष्ण गौतम की गज़ल पढ़िए --

अभी रहने दीजिए..!


पलाश  लायी हैं एक मार्मिक रचना --

बदलते इन्तजार


अनिता निहलानी जी आशा का सन्देश दे रही हैं -

रोज नया सूरज उगता है


स्वराज्य करुण जी का मानना है --

दागी चेहरे ओझल होंगे सत्याग्रहों के सैलाब में


कैलाश सी० शर्मा जी की रचना --

मत रिश्तों की आज दुहाई मुझको दो


डा० रूपचन्द्र शास्त्री जी की नयी रचना नयी तकनीकि पर -

"वेबकैम की शान निराली


रविकर  की रचना पढ़िए -

प्रेम-बंधन सड़ चुके हैं गल चुके हैं


करण समस्तीपुरी  लाये हैं --

देसिल बयना 85 : आँख में लोर नहीं, दाँत निपोर…


वंदना गुप्ता जी मन की चंचलता को कह रही हैं -

चंचल चंचल रे मना


महेंद्र मिश्र जी बता रहे हैं --

व्यक्ति और परिवार निर्माण .


निवेदिताजी के मन की उलझन पढ़िए -

मन और मानस .


पूनम श्रीवास्तव जी का --
निराला बचपन

आज बस इतना ही …. आशा है आपको यह प्रयास पसंद आया होगा … आभार ..नमस्कार -संगीता स्वरुप
 
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