खास चिट्ठे आपकी नज़र






कुछ खास चिट्ठे आपकी नज़र कर रही हूँ उम्मीद है आपकी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे 









मैं उन्हीं सबमें हूं जो मेरे भीतर हैं  

सही कहा 

 

महेन्‍द्र प्रताप पाण्‍डेय ‘‘नन्‍द'' की दो कविताएँ

अनमोल मोती

 

तीन कवितायेँ ...ऋषभ देव शर्मा

खुद बोलती हैं 


सिर्फ तेरी रहमत

और क्या चाहिए फिर 


तवा अभी ठंडा है

वक्त लगता है गर्माने में 


अर्थहीन

इनके भी अर्थ होते हैं 


गोहरबार(मोती का पानी)

एक दर्द बह गया 


ये तो हद हो गयी………अब टी वी पर भी आ गये

तो और क्या चाहिए 


बम्बई (मुम्बई) में सभा

जानिए क्या हुआ वहां

 

फासले !

कब मिटते हैं 


इसे चेतावनी नहीं सच समझें ..... ( जरा संभल जाईये ) .......>>> संजय कुमार

बिलकुल सही कहा 


२६ जुलाई - विजय दिवस

शत शत नमन

 

इनसान भी फूलों की तरह खिल सकते हैं...खुशदीप

इसमें क्या शक है


जय जय भारत के पहलवान ............................योगेन्द्र मौदगिल जी की बेहतरीन रचना

जय हो 



लघुकथा- मैं---- नहीं

तो फिर कौन

 

चौथा आदमी

उसकी भी अजब कहानी 




मेरे ख्याल से आज के लिए इतने लिंक्स काफी होंगे ........फिर जैसे ही वक्त मिलेगा

फिर हाजिर हो जाउंगी 


 
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