ज़रा एक नज़र इधर भी………हम भी खडे हैं राह में………ये है मेरा सफ़र


वंदना गुप्ता का खामोश सफ़र


प्रिय मित्रो सादर ब्लॉगस्ते!  आइये मित्रो आज क्रिसमस के शुभ अवसर पर काजू और किशमिश खाते हुए मिलते हैं ब्लॉग जगत के एक सक्रियसदस्य से. जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ वंदना गुप्ता जी की. दिल्ली के आदर्श नगर में रहते हुए अपने माता-पिता केआदर्शों को मन में संजोये हुए ये लगी हुईं हैं ब्लॉग लेखन द्वारा हिंदी माँ की सेवा में. इनके पिता तो चाहते थे  किउनकी बेटी आई.ए.एस. अधिकारी बने लेकिन बन गयीं ये लेखक और ब्लॉगर. अब होनी को जो मंज़ूर होता है वो हीहोता है. अब सोचिये यदि ये आई.ए.एस. अधिकारी  बन जाती तो ब्लॉग जगत की रौनक का क्या होताअथवा ब्लॉगर सम्मेलन उबाऊ न हो जाते. तो आइये धन्यवाद दें उस दुनिया बनाने वाले को जिन्होंने इस दुनिया कोऔर वंदना गुप्ता जी को बनाया और इन्हें आई.ए.एस. अधिकारी नहीं बनाया. वंदना गुप्ता जी लेखन की विविधविधाओं में लिखती हैं और बाकी बचा-खुचा चलिए इन्हीं से पूछ लेते हैं.  आगे...

ये नही देखा तो कुछ नही देखा …………


अनोखी यात्रा ………अनोखे पल

वन्दना at ज़ख्म…जो फूलों ने दिये - 21 seconds ago
चलिए मेरे साथ एक सफ़र पर अरे ये क्या ये पिलर ४२० बीच में कहाँ से आ गया कसम से टू मच हो गया ये तो उफ़ ...........ब्लोगर मिलन के मारे बेचारे पिलर ४२० पर ही अटक गए आधी ब्लोगर मीट तो नांगलोई में सिमट गयी ब्लोगर्स की मस्ती तो यहीं शुरू हो गयी चाय काफी की चुस्की साथ में मौसम सुहाना ये सफ़र तो रहा बड़ा मस्ताना ये सांपला में कौन पधारे देखें सारे सांपला वाले कोई इच्छाधारी तो नहीं आया हाँ हाँ ..........आया न सारे ही तो इच्छाधारी थे .........हा हा हा हमने दी नहीं कोई झूठी खबर देख लो अंतर्राष्ट्रीय मिलन ही था बोर्ड लगवा दिया गया स्वागत समारोह में ब्लोगर्स ने धमाल किया अब जाट देवता सं... more »
 
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