फेसबुक पर मानसिक जंग की कुछ चुनिंदा शब्‍द तस्‍वीरें और अन्‍नास्‍वामी प्रवचन माला को 'फेसबुक महात्‍म्‍य' शीर्षक से पुस्‍तक रूप में प्रकाशित किया जा रहा है

गरीब का भूखा पेट
और उसमें से रिसती
आंतडि़यों की चरमराहट 
के रुदन को सुन वोट-पिपासु
सक्रिय हो उठे और जोर से
खिलखिलाए कुटिल हंसी

इस नाजुक दयनीय दौर में
दया के आकांक्षी असल में कौन हैं ?

वोट और वोटर दोनों की कीमत
लगाई जाती है और तेजी से गिराई जाती है
यही सच्‍ची राजनीति कहलाती है।






2.
मुदित हैं सब जानवर इस ऐलान से
कि अब उन्‍हें मारा नहीं, परदे में
सिर्फ परदे के नीचे ढका जाया करेगा।

निर्वाचन आयोग का हालिया फरमान जिसमें माया और हाथी की काया को परदे में सहेजने का आदेश पारित किया गया है।




3.
बंदर के बारे में आपकी असंतुलित टिप्‍पणियां मेनका जी को डिस्‍टर्ब कर सकती हैं। कृपया चौकस रहें। बंदर को कई बार अपने सैलफोन पर उनसे बतियाते पाया गया है। वैसे भी जीवन में उसूल बना लें कि कभी किसी के प्रति असंतुलित व अभद्र टिप्‍पणियां एवं चित्रों का प्रयोग न करे। यह हमारी कमजोरी का वायस है।




4.
एक नया निर्णय लिया गया है अब असली हाथियों से मूर्तियां पर परदा चढ़ाने का कार्य कराया जाएगा। हाथीवान शीघ्र संपर्क करें, इच्‍छुक हाथी खुद अपने आवेदन भी ई मेल से भेज सकते हैं।


5.
क्‍या यह सच है कि माया की मूर्तियों ने घूंघट ओ़ढ़ने और उनके हाथियों ने दांत छिपाने से मना कर दिया है ?


6
दिल्‍ली में आज धूप चिढ़ाकर चली गई 
और कल जो बंदर किसी ने पकड़ा था
आज वह कूद-छूट कर फरार हो गया।

अब कल मिलेंगे
रात को बुनेंगे जो
सपने अपनों को
बांटेंगे हम, मिलेंगे।


7 .
चल कर नेहरू प्‍लेस
कुछ तकलीफ पैरों को दूं

ऊंगलियां तो कीबोर्ड पर
सुबह से नृत्‍य कर रही हैं

पैरों को तकलीफ देने का वायदा
जालिम ऊंगलियों ने ही किया है

हाथ की ऊंगलियां बख्‍शती नहीं
न पैरों को, न दिमाग को, न खुद को।


8.
कुकर्मों पर परदा डालना कहां तक उचित है
पूछ रही हैं माया और हाथी की मूर्तियां
हमें सर्दी भी तो नहीं लग रही है
आप बे-वजह परेशान क्‍यूं हैं


9.
सेफबुक शुरू करेगी सरकार
फेसबुक के खतरों को भांपने के बाद
सरकार की एक महत्‍वपूर्ण ऐतिहासिक पहल
जोखिम का नायाब हल।

चीयर्स फॉर सेफबुक।


10.
मायावती ने अपने जन्‍मदिन पर भी झूठ बोलने से परहेज नहीं किया। जिन हाथियों को बनाने और उन्‍हें परदे के भीतर छिपाने में ही करोड़ों खर्च कर दिए गए। उन्‍हें 'खुला हाथी लाख का, बंद हाथी सवा लाख' का बतलाकर अवाम को फिर बातों की मायाबाजी से मूर्ख बनाने की कवायद में जुट गईं।


और अंत में एक सुखद सूचना


फेसबुक पर आज अन्‍नास्‍वामी प्रवचन माला का सांतवां दिन हैं और एक प्रतिष्ठित प्रकाशक महोदय ने इसके संपादित अंशों को सार्थक टिप्‍पणियों और टिप्‍पणीकारों के चित्र सहित प्रकाशन करने की स्‍वीकृति दे दी है। आप भी इस लिंक पर क्लिक करके इसमें शामिल हो सकते हैं। 

5 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

रंग बिरंगी राजनीति है, रंग बिरंगी चालें,
किसके खाँचे देश बचा जो, किसके खाँचे ढालें।

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

वाणी गीत said...

एक से बढ़कर एक !

D.P.Mishra said...

बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......

Rajput said...

बेहतरीन और प्रशंसनीय

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